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नवम्‍बर  2009
संपादक
Pradhan Sampadak
अरुण कुमार झा 
प्रधान सम्पादक
  
 पार्वती सिंह
प्रबंध संपादक 
vijay jee
विजय रंजन
 सम्पादक
विनय कुमार मिश्र 
सम्बद्ध सम्पादक 
 

फिरंगिया कहता है!

व्‍यंग्‍य


मुम्बईया: - हेल्लो सरजी ,लन्दन का क्या हालचाल है?फिरंगिया:- एकदम ठीक है .बम्बई ...अर्र मेरा मतलब मुंबई का क्या हाल चाल है मुम्बईया: - एकदम मजे में है. अभी राज ठाकरे ने करन जोहर से माफी भी मंगवा ली है...।ंफिरंगिया: - हां सुना है..गांधीजी के जन्मदिवस पर करन जोहर ने माफी मांग के राज ठाकरे का क्रोध शांत कर दिया अन्यथा बेचारे राज ठाकरे को क्रोधित होना पड़ता और उनके कार्यकार्तओं को तोड़ फोड़ करना पड़ता ...बेचारों को बेवजह धरना प्रदर्शन की तकलीफ से बचा लिया। मुम्बईया: - हम्म,अच्छा हुआ बेचारे माइकल जैक्सन ने कभी मुंबई को बम्बई नहीं कहा होगा ,नहीं तो वो भी यहाँ आकर राज ठाकरे के साथ फोटो खिंचवाने का सौभाग्य प्राप्त नहीं कर पता. माइकल जैक्सन से याद आया.. ओबामा ने गांधीजी के बारे में कुछ कहा था...। फिरंगिया: - हांएक स्कूल के फंक्शन में किसी बच्चे ने उनसे सवाल किया कि वो किस इतिहास पुरुष के साथ भोजन करना पसंद करेंगेतो ओबामा ने जवाब दिया गाँधीक्यूंकि वो उन्हें अपना हीरो मानते हैंजिन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह से विश्व के सबसे बड़े साम्राज्य कि नीवे हिला दी। मार्टिन लूथर किंग ने भी गाँधी से प्रेरणा ले कर अमेरिका में अश्वेतों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया था। अगर गाँधी नहीं होते तो शायद अमेरिका में भी सामाजिक भेदभाव अभी भी होता. मुम्बइया: - हां यार कितने गर्व कि बात है ना हमारे लिए.और इंग्लैंड में गाँधी जी के बारे में लोग क्या सोचते है। फिरंगिया: - हा हा हा ..यहाँ तो अभी पिछले दिनों एक सर्वेक्षण हुआ जिसमे लोगो से विंस्टन चर्चिल और गांधीजी के बारे में लोगो से राय मांगी गयी तो लगभग 47 प्रतिशत लोगो के हिसाब से ये काल्पनिक पात्र थे. जबकि शेर्लोक होम्स एक सचमुच का मनुष्य ....। मुम्बइया: - इसमें हंसने कि क्या बात है यार,कुछ दिनों में भारत में भी यही होगा। लगता है अलबर्ट आइन्सटाइन कि भविष्यवाणी सच हो रही है...। फिरंगिया: - क्या कहा था आइन्स्तैन नेमुम्बईया: - यही कि आने वाली पीढ़ियाँ ये शायद ही स्वीकार करेंगी कि हाड़ मांस में गाँधी जैसा कोई व्यक्ति इस संसार में सचमुच था....। फिरंगिया: - तो आइन्स्तैन ने यह बात पहले ही भांप ली थीहाँ और सच भी है... सुनकर और पढ़कर अजीब ही लगता है कि कोई आदमी सिर्फ अहिंसा और सत्याग्रह और बिना किसी युद्ध के ब्रिटिश साम्राज्य को खत्म कर दे...। कहानी ही तो लगती है...यदि आज मुंबई में कोई गाँधी अनशन पर बैठ जाए..उत्तर भारतियों के साथ हो रहे भेदभाव पर...जैसा गांधीजी ने साउथ अफ्रीका में भारतियों के साथ हो रहे भेदभाव पर किया था,तो क्या वहां के गुंडे ब्रिटिश सरकार कि तरह सच्चाई के आगे झुकेंगे या गोडसे कि तरह आके उसे गोली मार देंगे?मुम्बईया: - मुझे तो लगता है वो आधुनिक गाँधी पहले ही मार दिया जाएगा...जैसा कुछ वर्षों पहले 1998 में एक सामाजिक कार्यकर्ता सफदर हाश्मी को दिल्ली कि सड़कों पर खुलेआम कांग्रेसी कार्यकार्तओं ने पीट-पीट कर मार डाला था...जब वो अपने नुक्कड़ नाटक ‘‘हल्ला बोल’’ का मंचन कर रहे थे। फिरंगिया: - हाँ यारउस केस का क्या हुआमुम्बईया:- हाँउस केस में दस लोगों को 2003 में गाजियाबाद कोर्ट ने सजा सुनाईजिसमे कांग्रेसी नेता मुकेश शर्मा भी है...। फिरंगिया: - ओह! तो अब तो उन लोगों ने हाई कोर्ट में अपील कर दी होगी...जो कि 10 साल और लेगी...। फिर सुप्रीम कोर्ट जो कि 10 साल और...तबतक वो लोग जमानत पर घूमते रहेंगे...और बुढापे में उनकी प्राकृतिक मृत्यु के बाद उनकी सजा पर मुहर लगेगी...।इसका मतलब यह हुआ कि अंग्रेज सरकार हमारे समाज और सरकारों से ज्यादा सहनशील और न्यायप्रिय थीसच ही तो है... हर वर्ष हजारों लोगों को शरणार्थी का दर्जा देती है और उन्हें नगरिक भी बना देती है...जैसे कि श्रीलंकन तमिल,अफगानीसोमालियनबंगलादेशीनेपालीपाकिस्तानी... लगभग दुनिया के हर देश के लोग यहाँ शरणार्थी बन कर आ रहे हैं और वो ही अधिकार पाते हैजो कि यहाँ के मूल नागरिकों के हंै...। फिर यहाँ धरना प्रदर्शन भी देते हंै...,जैसे कि अभी कई तमिलों ने यहाँ के संसद भवन के सामने लगभग 3-4 महीने तक लगातार धरना दिया थाजिससे कि कामकाज काफी प्रभावित हुआ था। मुम्बईया: - ...और वो धरना किस लिए थाक्या अंग्रेज सरकार तमिलों से भेदभाव करती है....। फिरंगिया: - नहीं यारवो तो श्रीलंकन सरकार के विद्ध था। मुम्बईया: - और वहां की जनता ने इसका विरोध नहीं कियाफिरंगिया: - नहीं...। मुम्बईया: - ओह ..इसका मतलब उनका समाज और उनकी सरकार हमसे ज्यादा सहनशील हैफिरंगिया: - हाँ...। मुम्बईया: - तब तो शायद अगला गाँधी पश्चिम में ही पैदा होगा....। फिरंगिया: - कहीं भी हो...कुछ सालों बाद उसकी भी जन्मशती मनाई जायेगी..लोग फूल माला अर्पण करेंगे.. भाषण देंगे.बात खत्म..।. चल यार मैं अब ऑफ लाइन हो जाता हूँ..। बड़ी अच्छी मूवी आ रही है टीवी पर...। मुम्बईया: - कौन सी?फिरंगिया: - मैं इंतकाम लूंगा ....इसमे धर्मेन्द्र अपने पिता के हत्यारों को चुन चुन कर कुत्तों की मौत मारता है....अच्छा फिर बात होगी...। ऑनलाइन आउंगा जल्दी ही...। मुम्बईया: - ठीक है ,मैं भी कोई बढिया मार धाड़ वाली हॉलीवुड की मूवी देखता हूँ.... बाय ...।

 लंदन से -विजय कुमार शुक्ला
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बोनसाई

बोनसाई
 
पिता ने
वषों नाईट शिफ्ट करके
बनाये थे पैसे
और ली थी एक कट्ठा जमीन,
पिता जाते थे - दौरे पर
बचाते थे पैसे
खरीदते थे सीमेंट, छड़, ईंट......
पिता ने कर्ज लिए थे ,
ऑफिस से
सवारी और घर अग्रिम के खाते में
फिर खडी की थी दीवारें,
पिता ने
बेच दिए थे माँ के गहने
माँ हो गई थी क्षत-विक्षत
इस प्रकार ढली थी छत,
पिता
बैठे हैं उसी घर के बाहर
जिनके लिए कोई भी कमरा
खाली नहीं है,
पिता सोते हैं ओसारे में
चरमराती चारपाई पर
पीते हैं बीडियां
बकते हैं गालियाँ
छिडचिडे हो गए हैं इन दिनों
माँ भी नहीं रही अब
खडी हो गई है दीवारें कमरों के बिच
बेटे सिर झुकाए
अपने-अपने हिस्से में प्रवेश करते
आज बडकी/मझली /संझली
कोई न कोई
दो रोटी दे ही देंगी पिता को
कल ही तो उसने दी थी
आज फिर ....ना बाबा ना .....
मेरे भी तो.....
घर नहीं रह गया पिता का
पिता नहीं रह गए बेटों के
कितनी तेजी से बदल गया सब कुछ
इसी जीवन यात्रा में....
ताड़ के रिश्ते तले
बोनसाई हो गया पिता


"विजय रंजन"