magazine
 
नवम्‍बर  2009
संपादक
Pradhan Sampadak
अरुण कुमार झा 
प्रधान सम्पादक
  
 पार्वती सिंह
प्रबंध संपादक 
vijay jee
विजय रंजन
 सम्पादक
विनय कुमार मिश्र 
सम्बद्ध सम्पादक 
 

मंचों का ठाट

प्रयोक्ता योग्यता निर्धारण: / 0
ऊसरउत्कृष्ट 

हिन्दस्‍वराज के शताब्‍दी वर्ष पर


 सजग, जागरूक भारतीय के मन में एक विचार कौंधता  है, गांधीजी आज यदि जिंदा होते, तो उनकी स्थिति क्या  होती? गांधीजी यदि आज होते, तो भारतीय राजनीति  और करोड़ों जनता की स्थिति क्या होती?

 अच्छा हुआ गांधीजी हमारे बीच नहीं हैं। स्वतंत्रता के  ध्वजवाहक गांधीजी तो स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, स्वतंत्रता  के जश्नों में डूबे राजनीतिज्ञों द्वारा नकार दिये गये थे। एक  तरपफ सत्ता के लिए भारत के धुरंधर राजनीतिज्ञ तोड़-जोड़  में लगे थे, दूसरी ओर गांधीजी बंद कमरे में एक कुर्सी पर  पड़े मायुसी के साथ आँसू बहा रहे थे।

गांधीजी नहीं हैं, तो क्या हुआ। गांधीजी के विचार आज भी जिंदा है, कल भी रहेगा। अफसोस तो इस बात का है कि गांधीजी को, गांधीजी के विचारों को इन राजनीतिज्ञों ने मंचों का ठाठ बना लिया है। मंच पर खड़े होकर गांधीजी के विचारों का बखान करने वाले ये माननीय नेतागण मंच से उतरते ही गांधी को भूल जाते हैं। अपने घरों में या अपने कार्यालयों में गांधीजी की तस्वीरें तो लगाते हैं, पर उसी कमरे में बैठकर गांधीजी के आदर्शो को भूलकर देश को बेचते हैं। ‘‘गांधी का खादी’’ अब गरीबों का नहीं रहा। अपने काले कारनामों को सफेद दिखाने के लिए खादी इन राजनीतिज्ञों के लिए एक लबादा मात्रा बन कर रह गया है।

सत्य और अहिंसा के मार्गदर्शक गांधी के इस देश में हिंसा लता की तरह सारे देश में कैसे फैल गया? गांधीजी के विचारों को असर इन नक्सलियों, अलगाववादियों, देहद्रोहियों पर क्यों नहीं होता? इन संस्थाओं के बौद्धिक मंचों की बुद्धि कुंभकरर्ण की तरह क्यों सोयी पड़ी है? गांधीजी तो राम के भक्त थे, वे स्वयं राम भी थे, जो 14 वर्षों का वनवास खत्म होने के पहले ही लंका पर विजय भी पा ली थी, पर गान्धीजी का वनवास लम्बे समय तक चल सकता है. वैसे भी समय तो इंतजार कराता ही है। हजारों वर्षों तक तप भी करने पड़ते हैं। आशा ही इंसान को जिंदा रखती है। आज अंधेरा है, तो कल उजाला होगा ही। गांधीजी के विचार भले ही आज काल कोठरी में पड़ा है, कल वह निकलेगा। सत्य अहिंसा की खुशबू बिखेरेगा।

अरूण कुमार झा

प्रधान संपादक 

Comments
Add New Search
wow gold  - wow gold   |117.94.38.xxx |2009-11-02 23:45:16
SSFIV will also make another less-flashy-but-key WOW Gold in the form of a comprehensive tuning to each of the existing Cheap WOW Gold fighters. The work will include balance tweaks the team World of Warcraft Gold wanted to include based on their own wow or experiences, as well as feedback from WoW gold kaufen fans. Returning fighters will get new WoW oro combos in addition to those seen in WOW soldi Fighter IV, which will require players to refine their fighting Logo Designstrategies. This work will be key to SSFIV's online matches, which are
getting some serious work done to them.
Write comment
Name:
Email:
 
Website:
Title:
UBBCode:
[b] [i] [u] [url] [quote] [code] [img] 
 
 
:angry::0:confused::cheer:B):evil::silly::dry::lol::kiss::D:pinch:
:(:shock::X:side::):P:unsure::woohoo::huh::whistle:;):s
:!::?::idea::arrow:
 

3.26 Copyright (C) 2008 Compojoom.com / Copyright (C) 2007 Alain Georgette / Copyright (C) 2006 Frantisek Hliva. All rights reserved."

 
Google Search
पथिक संख्या
mod_vvisit_countermod_vvisit_countermod_vvisit_countermod_vvisit_countermod_vvisit_countermod_vvisit_counter
mod_vvisit_counterआज37
mod_vvisit_counterकल41
mod_vvisit_counterइस सप्ताह104
mod_vvisit_counterइस माह456
mod_vvisit_counterकुल20147
Breaking News
चाह
                                                            
तितली रंग फूल खुशबू
सबको मैंने सराहा था 
उन्मुक्त गगन में मैं भी खेलूँ 
ऐसा मैंने चाहा था
दमके दामिनी बादल गरजे 
कोयल ने गीत सुनाया था 
वर्षा में मैं जी भर भीगूँ 
ये सब मैंने गाया था
स्निग्ध छटामय हो परिज़ाद 
गुलमोहर भरमाया था 
अद्भुत रूप नैनों में भर लूँ 
मन मयूर लहराया था
झिलमिल रोशन तारे चमके 
चाँद जरा शरमाया था
झरती चाँदनी आँचल में लूँ 
श्रृंगारित हो गाया था
एम.ए. शर्मा ’सेहर’