| ए0पी0 सिंह जैसे कर्तव्यनिष्ठ |
1991 बैच के अधिकारी श्री सिंह के पास प्रशासनिक दक्षता का एक लम्बा अनुभव है, जिसके फलस्वरूप श्री सिंह के कृषि विभाग में योगदान देने के पश्चात से राज्य में भीषण सुखाड़ की परिस्थिति में इन्होने केन्द्र के द्वारा दिल्ली में आयोजित बैठक में कृषि सचिव के रूप में उपस्थित होकर श्री सिंह ने झारखण्ड राज्य के हालात पर जो जानकारी दी उसके फलस्वरूप केन्द्र ने भी सार्थक पहल करते हुए इस राज्य की सुधि ली। यही नहीं श्री सिंह मत्स्य व पषुपालन विभाग में भी कार्य संस्कृति को यथासंभव सुधार कर यहां एक स्वस्थ्य कार्यप्रणाली का सृजन किया है। श्री सिंह का मानना है कि राज्य में बेहतर कृषि की पूर्ण संभावना है इसके लिए व्यापक प्रयास भी किये जा रहे हैं तथा राज्य कृषि आधारित प्रदेश हो इसके लिए मूल भुत प्रक्रिया के साथ-साथ कारगर प्रयास भी निरंतर जारी है। विदित हो कि श्री सिंह भारतीय प्रशासनिक अधिकारी के रूप में पश्चिम सिंहभूम, बोकारो, गिरीडीह, गढ़वा, हजारीबाग में उपायुक्त रह चुके हैं, जब उनकी पदोन्नति हुयी तो उन्हे संथाल परंगना का आयुक्त बनाया गया। श्री सिंह आयुक्त के रूप में भी संथाल परगना में काफी कम समय में ही द्रूत गति से कार्यो का संपादन किया जिसके फलस्वरूप श्री सिंह संथाल परंगना में लोकप्रिय आयुक्त की संज्ञा पाने में सफल रहे थे। इनकी बेहतर कार्य प्रणाली व कार्यदक्षता को देखते हुए सरकार ने इन्हें भवन निर्माण विभाग का सचिव बनाने के साथ-साथ इन्हें परिवहन विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा था। वर्तमान समय में श्री सिंह अपने अधीनस्थ विभाग को न सिर्फ दुरूस्त करने में सफल हुये हैं, बल्कि विभागीय कार्यो का निष्पादन व विभागीय कार्य यथाशीघ्र संपन्न कर रहे हैं। श्री सिंह का मानना है कि विभाग के अधीन जितने भी कार्य संपादित हो रहे हैं उनमें पारदर्शिता के साथ-साथ कार्य के प्रति गम्भीरता बरती जाय जिससे कि कार्यो में किसी प्रकार की शिथिलता न हो। |







झारखण्ड के कृषि, मत्स्य एवं पषुपालन विभाग के सचिव के रूप में अमरेन्द्र प्रताप सिंह के योगदान देने के पश्चात से इस विभाग में एक नये कार्यसंस्कृति का सृजन हुआ है। गौरतलब हो कि श्री सिंह राज्य में कर्तव्यनिष्ठ व अनुशासनप्रिय भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में काफी लोकप्रिय हैं। 










