| छमकछल्लो कहिस |
महिलाओं के अंतर्वस्त्र? राम-राम, तोबा-तोबा! छम्मक्छल्लो के देश में महिलाओं की बात? राम-राम, तोबा-तोबा!.छम्मक्छल्लो ने देख है कि महिलाओं की बात आते ही लोगों के स्वर अपने -आप धीमे हो जाते हैं. सुर धीमा हो तो वह फुसफुसाहट में बदल जाती है. ऐसा लगाने लगता है, जैसे महिला पर नहीं, किसी गलत, अवैध या गंदी चीज़ पर बात की जा रही हो. बात करते समय यह अक्सर कह दिया जाता है कि "लेडीज़" हैं, बेचारी. यानी लेडीज़ या स्त्री होना एक पूरी की पूरी बेचारगी का बायस है. फलाने जो हैं, अमुक के पिता हैं, या भाई हैं या पुत्र हैं या पति हैं, मगर इसके उलटा जाते ही आवाज़ के तार धीमे पड़ जाते हैं. अंतिम रिश्ते में तो लोग और भी इतने असहज हो जाते हैं, जैसे कोई बड़ी ही गलत बात कहने जा रहे हों. |
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