magazine
नवम्बर 2009 |
Google Search
पथिक संख्या






![]() | आज | 32 |
![]() | कल | 65 |
![]() | इस सप्ताह | 164 |
![]() | इस माह | 516 |
![]() | कुल | 20206 |
Breaking News
| चाह |
![]() तितली रंग फूल खुशबू सबको मैंने सराहा था उन्मुक्त गगन में मैं भी खेलूँ ऐसा मैंने चाहा था दमके दामिनी बादल गरजे कोयल ने गीत सुनाया था वर्षा में मैं जी भर भीगूँ ये सब मैंने गाया था स्निग्ध छटामय हो परिज़ाद गुलमोहर भरमाया था अद्भुत रूप नैनों में भर लूँ मन मयूर लहराया था झिलमिल रोशन तारे चमके चाँद जरा शरमाया था झरती चाँदनी आँचल में लूँ श्रृंगारित हो गाया था एम.ए. शर्मा ’सेहर’
|













