| क्या समाज का काम सेक्स पर पहरा देना है |
सेक्स और समाज का सम्बन्ध ऐसा बन गया है जैसे समाज का काम सेक्स पर पहरा देने का है , सेक्स को मानव से दूर रखने का है . क्या वास्तव में समाज में सेक्स केलिए घृणा का भाव है ? क्या समाज आरम्भ से ऐसा था ? नहीं , ऐसा नहीं है . सेक्स यांनी काम घृणा का विषय नहीं होकर आनंद का और परमात्मा को पाने की ओर पहला कदम है . आप भी सोचते होंगे कि जब काम इतना घृणित क्रिया है ,भाव है तो पवित्र देवालयों , प्राचीन धरोहरों आदि की मंदिर के प्रवेश द्वार या बाहरी दीवारों पर काम भावना से ओत-प्रोत मैथुनरत मूर्तियाँ अथवा चित्र आदि क्यों हैं ? इस पोस्ट में आपकी इस साधारण शंका का समाधान करने का प्रयास किया गया है . प्रस्तुत है ” राकेश सिंह जी ” का यह आलेख : -* आखिर हमारे देवालयों मैं अश्लील मूर्तियाँ/चित्र क्यों होते हैं? इधर-उधर बहुत छाना पर इसका वास्तविक और और सही उत्तर मिला मुझे महर्षि वात्सयायन रचित कामसूत्र में | वैसे तो बाजार में कामसूत्र पर सैकडों पुस्तक उपलब्ध हैं और लगभग सभी पुस्तकों में ढेर सारे लुभावने आसन चित्र भी मिलेंगे | पर उन पुस्तकों में कामसूत्र का वास्तविक तत्व गायब है | फिर ज्यादातर पाठक कामसूत्र को ६४ आसन के लिए ही तो खरीदता है, तो इसी हिसाब से लेखक भी आसन को खूब लुभावने चित्रों के साहरे पेश करता है | पर मुझे ऐसी कामसूत्र की पुस्तक हाथ लगी जिसमे एक भी चित्र नहीं है और इसे कामसूत्र की शायद सबसे प्रमाणिक पुस्तक मानी जाती है | महर्षि वात्सयायन रचित कामसूत्र के श्लोक थोड़े क्लिष्ट हैं, उनको सरल करने हेतु कई भारतीय विद्वानों ने इसपे टिका लिखी | पर सबसे प्रमाणिक टिका का सौभाग्य मंगला टिका को प्राप्त हुआ | और इस हिंदी पुस्तक में लेखक ने मंगला टिका के आधार पर व्याख्या की है | लेखक ने और भी अन्य विद्वानों की टीकाओं का भी सुन्दर समावेश किया है इस पुस्तक में | |
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हम अखबार वाले हैं
हमको जानते हो... हम कौन हैं? जरा तमीज से बात करो हमसे वरना हम........छाप देगे।क्या बात है। आज शहर हो या प्रदेश या फिर देश-दुनिया किसी भी स्थान पर देखने को मिल जाते हैं 'प्रेस' को अपने नाम के साथ जोडऩे वाले। प्रेस का मतलब इनके लिये किसी संस्थान में नौकरी करने वाला एक कर्मचारी नहीं बल्कि खुद प्रेस मालिक अर्थात अखबार वाला होता है। हर किसी से बोलने का लहेजा भी कुछ अलग होता है इनका।
समान शिक्षा की गारंटी से ही बचेगा देश
झारखंड पुलिस को मिली बड़ी सपफलता
सूझ-बुझ और इच्छा शक्ति के चलते कल दोपहर झारखंड पुलिस को बहुत बड़ी सफलता नसीब हुई. राँची के बड़े व्यवसायी-पुत्र लव भाटिया का अपहरण पिछले दिनों हो गया था. अपरहण के मात्र 12 घंटों के के भीतर लव भाटिया को सकुशल मुक्त करवा लिया गया. अपहरण करने वाले वैशाली के चन्दर सोनार गिरोह को उस समय मुँह को खानी पड़ी, जब पुलिस अचानक राँची स्थित एच0ई0सी के सेक्टर 2 के आवास संख्या बी-1139 पर धावा बोल दिया, जहाँ पर लव भाटिया को उक्त मकान के बाथरूम में बांध कर छुपा रखा था. मौके पर पुलिस मुठभेड़ मंे 3 अपराधी मारे गये तथा 10 अपराधी पकड़ में आ गये. साथ ही ब
ड़ी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद की गयी. लव भाटिया को अपराधियों ने गुरूवार की रात 11 बजेे के लगभग व्यवसाय स्थल से आवास पहुँचने के क्रम में बड़े नाटकीय ढंग से अपरहण कर लिया गया था. कैपिटल हिल के मालिक आशीष भाटिया के पुत्र लव भाटिया को मुक्त करवाने के वास्ते राँची के वरीय पुलिस अधीक्षक श्री प्रवीण कुमार सिंह हजारीबाग एस0 पी0 को फोन पर इसकी सूचना दी. इनकी सूचना पर हजारीबाग के एस0पी0 श्री पंकज कम्बोज ने बरही इलाके को नाकेबंदी कर धर-पकड़ की त्वरित कार्रवाई कर अपराधियों को और उनके ठीकानों पता लगया. इसी के आधार पर राँची स्थित एच0ई0सी के आवास संख्या बी-1139 पर छापामारी कर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की. अब प्रशंशा में राँची के चेम्बर के अधिकारी से लेकर हमेशा से ऐसे मौके की तलाश में रहने वाली छोटी-बड़ी पार्टियों के लोगों के अलावा जिनका उछल-कूद और पूतला दहन और धरना-प्रदर्श करना और बेमतलब का शोर मचाना ही पेशा है, ने झूम-झूम कर पुलिस की प्रशंशा के गीत गाते नजर आ रहे हैं. दूसरी ओर पुलिस भी अपने इस कार्रवाई से इतरा रही है. वहीं एच0ई0 सेक्टर 2 की निवासी विधवा आशा देवी के सात वर्षीय पुत्र गणेश सात से लापाता है, जिसकी खोज-खबर आज तक पुलिस को नहीं हो
पाई. या खोज खबर लेना उचित नहीं समझती. आशा देवी का मानना है कि पुलिस सिर्फ बड़े लोगों के लिए ही काम करती है, भले ही पुसिस अपनी सफलता पर इतरा ले, लेकिन उनकी छवि हमेशा से गरीब विरोधी और दमन की रही है. |























