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नवम्‍बर  2009
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प्रवेश फॉर्म
क्या समाज का काम सेक्स पर पहरा देना है

सेक्स और समाज का सम्बन्ध ऐसा बन गया है जैसे समाज का काम सेक्स पर पहरा देने का है , सेक्स को मानव से दूर रखने का है . क्या वास्तव में समाज में सेक्स के

लिए घृणा का भाव है ? क्या समाज आरम्भ से ऐसा था ? नहीं , ऐसा नहीं है . सेक्स यांनी काम घृणा का विषय नहीं होकर आनंद का और परमात्मा को पाने की ओर पहला कदम है . आप भी सोचते होंगे कि जब काम इतना घृणित क्रिया है ,भाव है तो पवित्र देवालयों , प्राचीन धरोहरों आदि की मंदिर के प्रवेश द्वार या बाहरी दीवारों पर काम भावना से ओत-प्रोत मैथुनरत मूर्तियाँ अथवा चित्र आदि क्यों हैं ? इस पोस्ट में आपकी इस साधारण शंका का समाधान करने का प्रयास किया गया है . प्रस्तुत है राकेश सिंह जी का यह आलेख : -*

आखिर हमारे देवालयों मैं अश्लील मूर्तियाँ/चित्र क्यों होते हैं? इधर-उधर बहुत छाना पर इसका वास्तविक और और सही उत्तर मिला मुझे महर्षि वात्सयायन रचित कामसूत्र में | वैसे तो बाजार में कामसूत्र पर सैकडों पुस्तक उपलब्ध हैं और लगभग सभी पुस्तकों में ढेर सारे लुभावने आसन चित्र भी मिलेंगे | पर उन पुस्तकों में कामसूत्र का वास्तविक तत्व गायब है | फिर ज्यादातर पाठक कामसूत्र को ६४ आसन के लिए ही तो खरीदता है, तो इसी हिसाब से लेखक भी आसन को खूब लुभावने चित्रों के साहरे पेश करता है | पर मुझे ऐसी कामसूत्र की पुस्तक हाथ लगी जिसमे एक भी चित्र नहीं है और इसे कामसूत्र की शायद सबसे प्रमाणिक पुस्तक मानी जाती है | महर्षि वात्सयायन रचित कामसूत्र के श्लोक थोड़े क्लिष्ट हैं, उनको सरल करने हेतु कई भारतीय विद्वानों ने इसपे टिका लिखी | पर सबसे प्रमाणिक टिका का सौभाग्य मंगला टिका को प्राप्त हुआ | और इस हिंदी पुस्तक में लेखक ने मंगला टिका के आधार पर व्याख्या की है | लेखक ने और भी अन्य विद्वानों की टीकाओं का भी सुन्दर समावेश किया है इस पुस्तक में |
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मीडिया भी सोचे पानी के सवाल पर

आइए बनाएं एक पानीदार समाज 

- संजय द्विवेदी                                                  

    मीडिया का काम है लोकमंगल के लिए सतत सक्रिय रहना। पानी का सवाल भी एक ऐसा मुद्दा बना गया है जिस पर समाज, सरकार और मीडिया तीनों की सामूहिक सक्रियता जरूरी है। कहा गया है-

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून

पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष,चून।

    प्रकृति के साथ निरंतर छेड़छाड़ ने मनुष्यता को कई गंभीर खतरों के सामने खड़ा कर दिया है। देश की नदियां, ताल-तलैये, कुंए सब हमसे सवाल पूछ रहे हैं। हमारे ठूंठ होते गांव और जंगल हमारे सामने एक प्रश्न बनकर खड़े हैं। पर्यावरण के विनाश में लगी व्यवस्था और उद्योग हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं। इस भयानक शोषण के फलित भी सामने आने लगे हैं। मानवता एक ऐसे गंभीर संकट को महसूस कर रही है और कहा जाने लगा है कि अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए होगा। बारह से पंद्रह रूपए में पानी खरीद रहे हम क्या कभी अपने आप से ये सवाल पूछते हैं कि आखिर हमारा पानी इतना महंगा क्यों है। जब हमारे शहर का नगर निगम जलकर में थोड़ी बढ़त करता है तो हम आंदोलित हो जाते हैं, राजनीतिक दल सड़क पर आ जाते हैं। लेकिन पंद्रह रूपए में एक लीटर पानी की खरीदी हमारे मन में कोई सवाल खड़ा नहीं करती। उदाहरण के लिए दिल्ली जननिगम की बात करें तो वह एक हजार लीटर पानी के लिए साढ़े तीन रूपए लेता है। यानि की तीन लीटर पानी के लिए एक पैसे से कुछ अधिक। यही पानी मिनरल वाटर की शकल में हमें तकरीबन बयालीस सौ गुना से भी ज्यादा पैसे का पड़ता है। आखिर हम कैसा भारत बना रहे हैं। इसके खामोशी के चलते दुनिया में बोतलबंद पानी का कारोबार तेजी से उठ रहा है और 2004 में ही इसकी खपत दुनिया में 154 बिलियन लीटर तक पहुंच चुकी थी। इसमें भारत जैसे हिस्सा भी 5.1

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पप्पू कांट डांस साला'

बॉलीवुड
की बिंदास अभिनेत्री जेनेलिया डिसूजा को अपनी फिल्म 'जाने तू या जाने ना' के लोकप्रिय गाने 'पप्पू कांट डांस साला' के डांस-स्टेप से इतना लगाव हो गया है कि उन्होंने कोरियोग्राफर से उस स्टेप को फिल्म 'लाइफ पार्टनर' के गाने 'तेरी मेरी ये जिंदगी' में भी आजमाने की गुजारिश कर डाली।
फिल्म से जुड़े एक सूत्र ने बताया, "जेनेलिया को इस बात का अंदाजा है कि 'पप्पू कांट डांस साला' के डांस स्टेप ने उन्हें काफी लोकप्रियता दिलाई है। यही कारण है कि 'लाइफ पार्टनर' की शूटिग के दौरान उन्होंने कोरियोग्राफर बास्को सीजर से उस स्टेप को 'तेरी मेरी ये जिंदगी' गाने में भी डालने की जिद कर दी।"सूत्र ने कहा, "हर आदमी हैरान था लेकिन सीजर को जेनेलिया की बात माननी पड़ी और अगले पल फिल्म के नायक फरदीन खान और अन्य कलाकार उस डांस स्टेप पर काम करते नजर आए। "'तेरी मेरी ये जिंदगी' गाने के बारे में बताते हुए निर्देशक रुमी जाफरी ने कहा कि जेनेलिया और फरदीन ने फिल्म में नवविवाहित जोड़े की भूमिका निभाई है और हनीमून के दौरान दोनों पर यह गाना फिल्माया गया है।'लाइफ पार्टनर' में जेनेलिया और फरदीन के अलावा प्राची देसाई और तुषार कपूर ने भी काम किया है। यह फिल्म 14 अगस्त को प्रदर्शित हो रही है।रंजीत राज '
 

आखिर कौन है जिम्मेदार...?

खोता हुआ पतित पावन गंगा का अस्तित्व
आखिर कौन है जिम्मेदार...?
-कुलदीप कुमार मिश्र
गंगा नदी हमारे जीवन का आधार व भारतीय संस्कृति- सभ्यता व धार्मिक आस्था का प्रतीक है। गंगा नदी को स्वर्ग से धरती पर लाने के लिये राजा भगीरथ ने बहुत घोर तप किया था। राजा के शापित पुत्रों को मां गंगा ने शाप मुक्त कर मोक्ष प्रदान किया। लेकिन वही गंगा आज ग्लोबल वार्मिंग  तथा मानवीय गतिविधियों और कुकृत्यों के कारण इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि उसका अस्तित्व ही खो सा गया है। पतित  पावन गंगा को लालची और अज्ञानी मानव ने अपने हित के लिये विषैले पदार्थ उसमे बहाकर इसको प्रदूषित कर दिया है।

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तितली रंग फूल खुशबू
सबको मैंने सराहा था 
उन्मुक्त गगन में मैं भी खेलूँ 
ऐसा मैंने चाहा था
दमके दामिनी बादल गरजे 
कोयल ने गीत सुनाया था 
वर्षा में मैं जी भर भीगूँ 
ये सब मैंने गाया था
स्निग्ध छटामय हो परिज़ाद 
गुलमोहर भरमाया था 
अद्भुत रूप नैनों में भर लूँ 
मन मयूर लहराया था
झिलमिल रोशन तारे चमके 
चाँद जरा शरमाया था
झरती चाँदनी आँचल में लूँ 
श्रृंगारित हो गाया था
एम.ए. शर्मा ’सेहर’